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9th June 2020by Shubham Agarwal0

एक तस्वीर ऐसी बने तो बना,
जो बनारस,बनारस ,बनारस लगे।

भारत की अत्यंत प्राचीन,ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरी में से एक काशी भी है,ये एकमात्र ऐसा शहर है ,जहां मौत भी हसती है और ज़िन्दगी भी जीने को तरसती है,जहां एक तरफ मोक्ष मिल रहा होता है तो दूसरी तरफ प्यार भी पल रहा होता है,यहां की भाषा में भी अलग ही मीठापन है ऐसा लगता है जैसे बनारसी पान ,वाणी के साथ घुल कर बाहर निकल रहा हो,और आप यकीन मानिए यहां की गालियां भी आपको कभी बुरी नहीं लग सकती।

अगर हम प्राचीन समय से इस शहर को देखेंगे तो ये पाएंगे कि बनारस 4 नदियों के तट पर बसा हुआ है:
-गंगा
-वरुणा
-गोमती
-अस्सी
हालांकि अब कुछ नदियां नाले में परिवर्तित हो गई हैं और अब केवल गंगा नदी का ही अस्तित्व पूर्ण रूप से बचा हुआ है,गंगा नदी को पूरे भारत में मां का दर्जा दिया गया है और बनारस शहर भी इसे बड़े ही श्रद्धापूर्वक पूजता है और हर शाम मां गंगा की आरती भी ‘ गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो ‘ के गीत से सराबोर हो उठती है।

धार्मिक विचारधारा से ओतप्रोत इस शहर में भगवान भोलेनाथ का भी दिव्य स्थान है जिसका भारत के १२ ज्योतिर्लिंग में भी एक स्थान है,और भगवान शंकर में लोगों की इतनी आस्था है कि यहां के लोगों की सुबह भी महादेव से और रात भी महादेव के उद्घोष से होती है,गंगा के किनारे पर बसा विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर हर रोज़ बनारस में एक रस को स्थापित करता है।

बनारस को मोक्ष प्रदान करने का भी वरदान प्राप्त है,दूर प्रदेश से लोग अपने प्रिय जनों की आत्मा की शांति के लिए बनारस आते हैं और मणिकर्णिका घाट को सौंपते हैं,इस घाट के श्मशान घट बन ने को लेकर कई प्रकार की मान्यताएं हैं हालांकि अभी तक किसी को बिल्कुल सत्य नहीं माना गया है।

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