OthersVairagya

17th August 2020by Shubham Agarwal0

वैराग्य,शब्द का नाम सुनते ही सन्यासी जीवन के सभी बिम्ब दिमाग़ में घूमने लगते हैं,ऐसा लगने लगता है जैसे घर छोड़ कर जाना हो,जंगल में कठिन जीवन बिताना हो,इन्हीं सब बातों का जहां ज़िक्र होता है वहां वैराग्य शब्द का प्रयोग होना शुरू हो जाता है,हालांकि ये धारणा ग़लत है कि वैराग्य का मतलब ही जंगल जाने से ,घर परिवार या संसार को छोड़ने से, साधु बनने से है, इस धारणा में थोड़े बदलाव की आवश्यकता है,क्योंकि आप सोचिए अगर सभी जंगल में या किसी पर्वत अथवा गुफा में चले जाएं वैराग्य के लिए तो वहां भी लोग एकत्रित हो सकते हैं और फिर से एक नगर बस सकता है,फिर वैराग्य अपना अर्थ भी खो सकता है,इसलिए,आइए देखते हैं हम इसमें कैसे बदलाव कर सकते हैं।

वैराग्य का मतलब दरअसल होता है,रंग बिरंगी दुनिया के बीच रह कर भी इससे आकर्षण का ना होना,अपनी अलग दुनिया बनाना जहां पर आप हर तरह के चकाचौंध में रहते हुए भी उससे कोषों दूर हों,मन का मोह भांग करना,चाहे कैसी भी परिस्थिति हो,धर्म का साथ देना,बिल्कुल निष्पक्ष रहना और सबसे ज़रूरी बात दुनिया की हर वस्तु आपके वश में हो,किन्तु आप उनमें से किसी के वश में ना हों,यही वास्तविकता है वैराग्य की,वैराग्य स्वयं को जानने और अपने अंदर एक नई ऊर्जा प्रकट करके ईश से मिलने का सबसे बेहतर उपाय है।

ऊपर लिखी सभी बातें,वैराग्य जीवन को दर्शाती हैं और बताती हैं कि आप रंग बिरंगी दुनिया में रहकर  वैराग्य जीवन जी सकते हैं।

किसी भी वास्तु,ज्योतिष संबंधी जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें।
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