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7th August 2020by Shubham Agarwal0

ज़िन्दगी अपने आप में एक कला है जिसे सीखना बेहद ज़रूरी है,और इस कला की सबसे खास बात है कि ये कला सबके लिए भिन्न है,इसलिए इस कला को कोई सीखा नहीं सकता है सिवाय स्वयं के,और जो इस कला को सीखते हैं दरअसल वही स्वयं को जान पाते हैं और जीवन को सूक्ष्म नज़र देकर इसे समझ पाते हैं,और जबतक इंसान इसको समझने से दूर भागता है तब तक ये साए की तरह पीछा करती है और परेशान करती है,इसलिए स्वयं को पहचानना बेहद ज़रूरी है ,जीवन रूपी कला को सीखने के लिए।

अब सवाल ये उठता है कि इस कला को कैसे सीखें?
हर इंसान के अंदर ईश्वर कोई न कोई विशेषता डालकर ही भेजते हैं,इस विशेषता की गूंज इंसान हर समय महसूस करता है,हर वक़्त उसकी आहट दिल में मौजूद रहती है,जिसे सुनना और उसी दिशा में बढ़ना हमारा कर्तव्य है,लेकिन कई बार ऐसा होता है कि दिल की आवाज़ को दबाकर हम उस रास्ते नहीं जा पाते और इस तरह हम जान बूझकर स्वयं को जानने से इनकार कर रहे होते हैं जो आगे चलकर हम पर ही भारी पड़ेगा क्योंकि आप जीवन में वही काम कर सकते हैं जो आपको पसंद आए और किसी भी काम को पसंद करने का अनुभव केवल दिल ही बता सकता है,दिल की उस काम में संतुष्टी ही बता सकती है कि आप उस काम को कितने जोश से करेंगे।
इसलिए दिल की सुनें ,स्वयं को पहचाने और अनमोल ज़िन्दगी के हर पल को अच्छी तरह जिएं।

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धन्यवाद

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