OthersAntim Samay ki manah sthiti

26th August 2020by Shubham Agarwal0

हर इंसान के जीवन में अंतिम समय या अंतिम पड़ाव बेहद महत्वपूर्ण होता है,ये पड़ाव इंसान को उसके पूरे जीवन की झलक दिखा देता है कि उसने अपने जीवन में कैसे कर्म किए हैं,क्या अच्छा किया है क्या बुरा किया है,ये सभी बातें इंसान अंतिम समय में सोचता है और उसे या तो इस बात की खुशी होती है या बेहद दुखी होता है,और अंतिम समय में पश्चाताप के विषय में ही सोचता है लेकिन उसके पास कोई विकल्प नहीं होता।

पौराणिक कथाओं में इसके एक दूसरे के विपरित उदाहरण देखने को मिलते हैं,आइए इसे उदाहरण की मदद से समझने की कोशिश करते हैं :
१.रावण जब माता सीता को ज़बरदस्ती लेकर लंका जा रहा था ,तब जटायु ने उनकी करुण पुकार सुन ,रावण पर हमला बोल दिया और बहादुरी से काफी देर तक युद्ध करते रहे,लेकिन रावण भी महा बलशाली था उसने आखिरकार जटायु के पंख काट दिए और जटायु इस तरह भूमि पर आ गिरे और अंतिम सांस गिनने लगे,इस बीच माता सीता को ढूंढ़ते हुए श्री राम उनके निकट पहुंचते हैं और ये जानने के पश्चात कि जटायु ने माता सीता को बचाने में अपना जान न्योछावर किया है,उन्हें बहुत दुख पहुंचता है लेकिन जटायु के संतुष्ट बातों ने राम को पुनः जागृत किया और आखिरकार जटायु अपने अंतिम समय में हंसते हुए और संतुष्ट भावना से स्वर्ग सिधार गए।
२.वहीं महाभारत में भीष्म कई दिनों तक शय्या पर लेटे,शारीरिक,मानसिक और भावनात्मक कष्ट सहते रहे और अंत समय में भी उन्हें पश्चाताप ही रहा कि वो अपनी कुलवधु का विवश होकर अपमान देखते रहे।

तो मानव मात्र का प्रयास यही रहना चाहिए के अपने जीवन काल में अच्छे कर्म करें। सभी कर्त्तव्यों और ऋणों से मुक्त हो जाएं। कभी किसी के साथ अन्याय ना करें और ना होने दें। ताकि वो एक संपूर्ण जीवन जिये और अपने अंतिम समय में मरनसैय्या पे वो अपनी मृत्यु की प्रतिक्षा सहर्ष करें ।

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