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5th June 2020by Shubham Agarwal0

चन्द्र ग्रहण एक प्रकार की खगोलीय स्थिति को कहते हैं जब चंद्रमा, पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रछाया में आ जाता है,और इसी क्रम में सूर्य,पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में अवस्थित होते हैं,चन्द्र ग्रहण शुरू होने से ठीक पहले ये काले रंग का होता है और धीरे धीरे सुर्ख लाल रंग का हो जाता है,सूर्य ग्रहण की अपेक्षा,चन्द्र ग्रहण को नग्न आंखों से देखा जा सकता है,क्योंकि चन्द्र ग्रहण लगने के पश्चात् चांद की उज्जवलता और भी कमज़ोर पड़ जाती है।

हिन्दू धर्मानुसार चन्द्र ग्रहण के पीछे राहु केतु होते हैं,एक पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत पाने को लेकर युद्ध चल रहा था ,इसपर भगवान विष्णु एक सुंदर कन्या मोहिनी का रूप धारण कर देवताओं को अमृत पिलाने चले गए,यह देखकर राहु नाम का असुर भी उसी में जाकर बैठ गया और अमृत पान कर लिया,इस बात की भनक सूर्य और चन्द्र को लग गई और उन्होंने भगवान विष्णु को ये बात बता दी,जिससे क्रोध में आकर भगवान विष्णु ने राहु की गर्दन सुदर्शन चक्र से काट दी ,चूंकि वो अमृत पी चुका था इसलिए मरा नहीं और उसका गर्दन और धड़ राहु केतु के नाम से जाना जाने लगा और ऐसी मान्यता है कि इसी कारण से राहु और केतु ,सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगाते हैं।

अगर हम २०२० की बात करें तो पहला चन्द्र ग्रहण १० जनवरी को लगा था और दूसरा चन्द्र ग्रहण ५ जून को लगने जा रहा है,जिसका समय ११:११ मिनट रात्रि से लेकर २:३४ मिनट भोर तक रहेगा,इस चन्द्र ग्रहण का सीधा संबंध वृश्चिक राशि के लोगों पर पड़ेगा इसलिए इस राशि में लोगों को थोड़ा सावधान रहने की ज़रूरत है,चन्द्र ग्रहण के समय किसी भी शुभ कार्य को करने से मना किया जाता है,हालांकि ५ जून को लगने वाले चन्द्र को उतना प्रभावी नहीं माना जा रहा है क्योंकि इस ग्रहण का प्रभाव उपछाया पर पड़ रहा है।

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